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महंगी पड़ेगी भूजल की बर्बादी, जुर्माना या जेल

लखनऊ उत्तर प्रदेश में भूजल का बेजा इस्तेमाल करने वालों को जेल जाना पड़ सकता है। सीएम योगी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यूपी ग्राउंड वॉटर (मैनेजमेंट ऐंड रेग्युलेशन बिल) 2019 को मंजूरी दे दी गई। यह दंड घरेलू व कृषि उपभोक्ताओं के लिए नहीं है। बिल के अनुसार कमर्शल, इंडस्ट्रियल, इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उपभोक्ताओं को पहली गलती पर 2-5 लाख रुपये तक जुर्माना भरना पड़ेगा या 6 माह से 1 साल तक जेल काटनी पड़ेगी। दोबारा पकड़े जाने पर लाइसेंस निरस्त होगा और सजा दोगुनी हो जाएगी। नियमन के लिए शासन स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य का गठन किया जाएगा। जिले से लेकर गांव तक कमिटी गठित होंगी। इनमें क्रमश: डीएम, नगर पालिका अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख व ग्राम प्रधान अध्यक्ष होंगे। पंजीकरण जरूरी सभी भूजल उपभोक्ताओं को पंजीकरण करवाना होगा। प्राधिकरण निकासी की सीमा, शुल्क व अनापत्ति तय करेगा। अपराध का निर्धारण प्रथम श्रेणी के मैजिस्ट्रेट करेंगे। सरकार को किसी भी उपभोक्ता को बिल के प्रावधानों से छूट देने का अधिकार होगा। बिल में भूजल प्रदूषण की रोकथाम, रेग्युलेशन और वर्षा जल संचयन के भी प्रावधान हैं।


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